vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 4: चतुर्थ अंश
»
अध्याय 12: यदुपुत्र क्रोष्टुका वंश
»
श्लोक 16
श्लोक
4.12.16
तच्चारिचक्रमपास्तपुत्रकलत्रबन्धुबलकोशंस्वमधिष्ठानं परित्यज्य दिश: प्रति विद्रुतम्॥ १६॥
अनुवाद
उस समय वे सभी शत्रु अपने पुत्रों, मित्रों, पत्नियों, सेनाओं और निधियों से रहित होकर अपने स्थान छोड़कर भिन्न-भिन्न दिशाओं में भाग गए।
At that time all those enemies, being devoid of their sons, friends, wives, armies and treasures, left their places and fled in different directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×