श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 10: ययातिका चरित्र  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  4.10.31-32 
दिशि दक्षिणपूर्वस्यां तुर्वसुं च समादिशत्।
प्रतीच्यां च तथा द्रुह्युं दक्षिणायां ततो यदुम्॥ ३१॥
उदीच्यां च तथैवानुं कृत्वा मण्डलिनो नृपान्।
सर्वपृथ्वीपतिं पूरुं सोऽभिषिच्य वनं ययौ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने दक्षिण-पूर्व में तुर्वसुको, पश्चिम में द्रुह्युको, दक्षिण में यदुको और उत्तर में अनुको को नियुक्त किया तथा पुरुको को सम्पूर्ण पृथ्वी के राज्य पर अभिषिक्त करके स्वयं वन को चले गए ॥31-32॥
 
He appointed Turvasuko in the south-east, Druhyuko in the west, Yaduko in the south and Anuko in the north. And after anointing Puruko over the kingdom of the entire earth, he himself went to the forest. 31-32॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे दशमोऽध्याय:॥ १०॥
 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd