श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 10: ययातिका चरित्र  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.10.30 
श्रीपराशर उवाच
पूरोस्सकाशादादाय जरां दत्त्वा च यौवनम्।
राज्येऽभिषिच्य पूरुं च प्रययौ तपसे वनम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - तत्पश्चात राजा ययाति ने पुरु से अपना बुढ़ापा लेकर उसे अपनी जवानी दे दी और उसे राजा पद पर अभिषिक्त करके वन को चले गये।
 
Shri Parashara said - Thereafter King Yayati took his old age from Puru and gave him his youth and after anointing him as the king, went to the forest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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