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श्लोक 4.10.30  |
श्रीपराशर उवाच
पूरोस्सकाशादादाय जरां दत्त्वा च यौवनम्।
राज्येऽभिषिच्य पूरुं च प्रययौ तपसे वनम्॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| श्री पराशर बोले - तत्पश्चात राजा ययाति ने पुरु से अपना बुढ़ापा लेकर उसे अपनी जवानी दे दी और उसे राजा पद पर अभिषिक्त करके वन को चले गये। |
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| Shri Parashara said - Thereafter King Yayati took his old age from Puru and gave him his youth and after anointing him as the king, went to the forest. |
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