| श्री विष्णु पुराण » अंश 4: चतुर्थ अंश » अध्याय 10: ययातिका चरित्र » श्लोक 29 |
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| | | | श्लोक 4.10.29  | तस्मादेतामहं त्यक्त्वा ब्रह्मण्याधाय मानसम्।
निर्द्वन्द्वो निर्ममो भूत्वा चरिष्यामि मृगैस्सह॥ २९॥ | | | | | | अनुवाद | | अतः अब मैं इसे त्यागकर और अपना मन भगवान् में लगाकर, निर्द्वन्द्व और निर्भय होकर मृगों के साथ वन में विचरण करूँगा॥29॥ | | | | Therefore, now, leaving this behind and fixing my mind on the Supreme Lord, I will roam about [in the forest] with the deer, free from conflict and without fear. ॥29॥ | | ✨ ai-generated | | |
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