| श्री विष्णु पुराण » अंश 4: चतुर्थ अंश » अध्याय 10: ययातिका चरित्र » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 4.10.24  | यत्पृथिव्यां व्रीहियवं हिरण्यं पशव: स्त्रिय:।
एकस्यापि न पर्याप्तं तस्मात्तृष्णां परित्यजेत्॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | सम्पूर्ण पृथ्वी पर जितने भी अन्न, जौ, स्वर्ण, पशु और स्त्रियाँ हैं, वे सब मिलकर भी एक मनुष्य के लिए तृप्त करने योग्य नहीं हैं; इसलिए लोभ का सर्वथा त्याग कर देना चाहिए ॥24॥ | | | | All the grains, barley, gold, animals and women on the whole earth are not satisfactory even for a single human being; therefore greed must be given up completely. ॥24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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