श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 10: ययातिका चरित्र  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.10.2 
यतिस्तुराज्यंनैच्छत्॥ २॥ ययातिस्तुभूभृदभवत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यति को राज्य की इच्छा नहीं थी, इसलिए ययाति राजा बन गये। 2-3.
 
Yati did not desire the kingdom, so Yayati became the king. 2-3.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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