श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  4.1.94 
कुशस्थलीं तां च पुरीमुपेत्य
दृष्ट्वान‍्यरूपां प्रददौ स कन्याम्।
सीरायुधाय स्फटिकाचलाभ-
वक्ष:स्थलायातुलधीर्नरेन्द्र:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
महाज्ञानी महाराज रैवत ने कुशस्थली नाम की एक भिन्न प्रकार की नगरी देखी और अपनी कन्या को स्फटिक पर्वत के समान वक्षस्थल भगवान हलायुध को दे दिया ॥94॥
 
Maharaja Raivat, who had immense wisdom, saw a different kind of city named Kushasthali and gave his daughter to Lord Halayudh, whose chest is like the crystal mountain. ॥94॥
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