श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  4.1.93 
श्रीपराशर उवाच
इतीरितोऽसौ कमलोद्भवेन
भुवं समासाद्य पति: प्रजानाम्।
ददर्श ह्रस्वान‍् पुरुषान् विरूपा-
नल्पौजसस्स्वल्पविवेकवीर्यान्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - जब भगवान ब्रह्माजी ने ऐसा कहा, तब प्रजापति रैवत पृथ्वी पर आए और उन्होंने देखा कि सभी मनुष्य छोटे, कुरूप, कम कान्ति वाले, कम वीर्य वाले और विवेकशून्य हो गए हैं ॥93॥
 
Shri Parasharji said - When Lord Brahmaji said this, Prajapati Raivat came to the earth and saw that all the humans had become small, ugly, less bright, less semen and devoid of conscience. 93॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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