श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  4.1.84 
कलामुहूर्त्तादिमयश्च कालो
न यद्विभूते: परिणामहेतु:।
अजन्मनाशस्य सदैकमूर्त्ते-
रनामरूपस्य सनातनस्य॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
जिनका जन्म-मरण नहीं है, जो नित्य और सदा एकरूप हैं तथा जो नाम-रूप से रहित हैं, उनकी महिमा का फल कालमुहूर्त आदि काल भी नहीं हो सकता ॥84॥
 
Even the time period like kalamuhurta etc. cannot be the cause of the results of His glory, Who does not have birth or death, Who is eternal and always the same and Who is devoid of name and form. ॥ 84॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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