श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  4.1.83 
श्रीब्रह्मोवाच
न ह्यादिमध्यान्तमजस्य यस्य
विद्मो वयं सर्वमयस्य धातु:।
न च स्वरूपं न परं स्वभावं
न चैव सारं परमेश्वरस्य॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
श्री ब्रह्माजी बोले - अजन्मा, सर्वव्यापी, सृष्टिकर्ता परमेश्वर के आदि, मध्य, अन्त, रूप, स्वभाव और तत्त्व को हम नहीं जान सकते ॥83॥
 
Shri Brahmaji said – We cannot know the beginning, middle, end, form, nature and essence of the unborn, omnipresent, creator God. 83॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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