श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  4.1.56 
सोमदत्त: कृशाश्वाज्जज्ञे योऽश्वमेधानां शतमाजहार॥ ५६॥ तत्पुत्रो जनमेजय:॥ ५७॥ जनमेजयात्सुमति:॥ ५८॥ एते वैशालिका भूभृत:॥ ५९॥ श्लोकोऽप्यत्र गीयते॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
कृशाश्व के सोमदत्त नामक पुत्र हुए, जिन्होंने सौ अश्वमेध यज्ञ किए। उनसे जनमेजय और जनमेजय से सुमति उत्पन्न हुए। ये सभी विशालवंश के राजा हुए। उनके विषय में यह श्लोक प्रसिद्ध है॥ 56-60॥
 
Krishasva had a son named Somadatta who performed hundred Ashwamedha Yajnas. From him was born Janamejaya and from Janamejaya was born Sumati. All of them became kings of Vishalvansha. This verse is famous about them.॥ 56-60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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