श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.1.5 
तद्यथा सकलजगतामादिरनादिभूतस्स ऋग्यजुस्सामादिमयो भगवान‍् विष्णुस्तस्य ब्रह्मणो मूर्त्तं रूपं हिरण्यगर्भो ब्रह्माण्डभूतो ब्रह्मा भगवान‍् प्राग्बभूव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इसका वर्णन इस प्रकार है - भगवान विष्णु सम्पूर्ण जगत के आदि कारण हैं। वे अनादि हैं और ऋक्-यजु-साम रूप में हैं। ब्रह्मा के रूप में भगवान विष्णु के अवतार ब्रह्माजी, ब्रह्माण्डीय हिरण्यगर्भ, सर्वप्रथम प्रकट हुए। 5॥
 
Its description is as follows – Lord Vishnu is the original cause of the entire world. They are eternal and in the form of Rik-Yaju-Sama. Lord Brahma, the embodiment of Lord Vishnu in the form of Brahma, the cosmic Hiranyagarbha, appeared first. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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