श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.1.43 
केवलाद‍्बन्धुमान्॥ ४३॥ बन्धुमतो वेगवान‍्॥ ४४॥ वेगवतो बुध:॥ ४५॥ ततश्च तृणबिन्दु:॥ ४६॥ तस्याप्येका कन्या इलविला नाम॥ ४७॥ ततश्चालम्बुषा नाम वराप्सरास्तृणबिन्दुं भेजे॥ ४८॥ तस्यामप्यस्य विशालो जज्ञे य: पुरीं विशालां निर्ममे॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
केवल से बन्धुमान, बन्धुमान से वैगवान, वैगवान से बुध, बुध से तृणबिन्दु हुए और तृणबिन्दु से पहले इलाविला नाम की एक कन्या उत्पन्न हुई, किन्तु बाद में अलम्बुषा नामक एक सुन्दरी अप्सरा उससे प्रेम करने लगी। उससे तृणबिन्दु को विशाल नाम का एक पुत्र हुआ, जिसने विशाला नाम की एक नगरी बसाई ॥43-49॥
 
From Keval was Bandhuman, from Bandhuman was Vaegavan, from Vaegavan was Mercury, from Budha was Trinabindu and before Trinabindu was born a girl named Ilavila, but later a beautiful nymph named Alambusha fell in love with her. From her, Trinabindu had a son named Vishal, who founded a city named Vishala. 43-49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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