श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 1: वैवस्वतमनुके वंशका विवरण  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.1.37 
राजवर्द्धनात्सुवृद्धि:॥ ३७॥ राजवर्द्धनसे सुवृद्धि, सुवृद्धे: केवल:॥ ३८॥ केवलात्सुधृतिर-भूत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उत्तम वृद्धि से ही, केवल और केवल से ही, उत्तमता उत्पन्न हुई ॥37-39॥
 
From good growth, only and from only, goodness was born. ॥ 37-39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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