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श्लोक 3.9.18  |
वय:परिणतो राजन्कृतकृत्यो गृहाश्रमी।
पुत्रेषु भार्यां निक्षिप्य वनं गच्छेत्सहैव वा॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! गृहस्थी के काम करते-करते जो गृहस्थ वृद्ध हो जाए, उसे चाहिए कि वह अपनी पत्नी को अपने पुत्रों को सौंप दे अथवा उसे अपने साथ वन में ले जाए॥18॥ |
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| O King! A householder who has reached old age while performing household duties should either hand over his wife to his sons or take her with him to the forest.॥ 18॥ |
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