अवज्ञानमहंकारो दम्भश्चैव गृहे सत:।
परितापोपघातौ च पारुष्यं च न शस्यते॥ १६॥
अनुवाद
गृहस्थ को अतिथि का अनादर करना, अहंकार या अभिमान दिखाना, उसे कुछ देकर पछताना, उसे मारना या उससे कटुवचन कहना उचित नहीं है॥16॥
It is not proper for a householder to disrespect a guest, to show arrogance or pride, to regret giving something to him, to strike him or to speak harshly to him.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥