श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.9.16 
अवज्ञानमहंकारो दम्भश्चैव गृहे सत:।
परितापोपघातौ च पारुष्यं च न शस्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गृहस्थ को अतिथि का अनादर करना, अहंकार या अभिमान दिखाना, उसे कुछ देकर पछताना, उसे मारना या उससे कटुवचन कहना उचित नहीं है॥16॥
 
It is not proper for a householder to disrespect a guest, to show arrogance or pride, to regret giving something to him, to strike him or to speak harshly to him.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)