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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 9: ब्रह्मचर्य आदि आश्रमोंका वर्णन
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श्लोक 15
श्लोक
3.9.15
अतिथिर्यस्य भग्नाशो गृहात्प्रतिनिवर्तते।
स दत्त्वा दुष्कृतं तस्मै पुण्यमादाय गच्छति॥ १५॥
अनुवाद
जब कोई अतिथि किसी के घर से निराश होकर लौटता है, तो वह (अतिथि) उसे उसके सारे बुरे कर्म दे देता है और उसके अच्छे कर्म स्वयं ले लेता है ॥15॥
When a guest returns disappointed from someone's house, he (the guest) gives him all his bad deeds and takes away his good deeds himself. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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