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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 9
श्लोक
3.8.9
वर्णाश्रमाचारवता पुरुषेण पर: पुमान्।
विष्णुराराध्यते पन्था नान्यस्तत्तोषकारक:॥ ९॥
अनुवाद
केवल वर्णाश्रम धर्म का पालन करने वाला मनुष्य ही भगवान विष्णु की पूजा कर सकता है; उन्हें प्रसन्न करने का अन्य कोई उपाय नहीं है ॥9॥
Only a man who follows the Varnashrama Dharma can worship the Supreme Being Vishnu; there is no other way to satisfy Him. ॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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