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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 40
श्लोक
3.8.40
सामर्थ्ये सति तत्त्याज्यमुभाभ्यामपि पार्थिव।
तदेवापदि कर्तव्यं न कुर्यात्कर्मसङ्करम्॥ ४०॥
अनुवाद
हे राजन! जब तुम्हारी सामर्थ्य हो, तब इन उपर्युक्त वृत्तियों का भी त्याग कर दो; केवल आपत्तिकाल में ही इनका आश्रय लो; अपने कर्मों को मत मिलाओ ॥40॥
O King! Give up these above mentioned tendencies also when you are capable; resort to them only in times of emergency; do not mix up your karmas. ॥40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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