श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  3.8.36-37 
दया समस्तभूतेषु तितिक्षा नातिमानिता।
सत्यं शौचमनायासो मंगलं प्रियवादिता॥ ३६॥
मैत्र्यस्पृहा तथा तद्वदकार्पण्यं नरेश्वर।
अनसूया च सामान्यवर्णानां कथिता गुणा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे नरेशर! इनके अतिरिक्त सब प्राणियों पर दया, सहनशीलता, सत्यनिष्ठा, सत्य, शौच, अधिक काम न करना, शुभेच्छा, प्रेम-कृपा, मैत्री, निःस्वार्थता, कृतघ्नता और किसी में दोष न देखना - ये सब वर्णों के सामान्य गुण हैं ॥36-37॥
 
Hey Nareshwar! Apart from these, kindness towards all living beings, tolerance, honesty, truth, cleanliness, not doing too much work, good wishes, loving-kindness, friendship, selflessness, ungraciousness and not seeing faults in anyone - these are the common qualities of all the varnas. 36-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)