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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 31
श्लोक
3.8.31
तस्याप्यध्ययनं यज्ञो दानं धर्मश्च शस्यते।
नित्यनैमित्तिकादीनामनुष्ठानं च कर्मणाम्॥ ३१॥
अनुवाद
अध्ययन, यज्ञ, दान और नित्यकर्म-ये भी उसके लिए विहित हैं ॥31॥
Study, Yagya, charity and the rituals of daily routine activities – these activities are also prescribed for him. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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