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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 30
श्लोक
3.8.30
पाशुपाल्यं च वाणिज्यं कृषिं च मनुजेश्वर।
वैश्याय जीविकां ब्रह्मा ददौ लोकपितामह:॥ ३०॥
अनुवाद
हे नरनाथ! लोकपितामह ब्रह्माजी ने वैश्यों को जीविका के लिए पशुपालन, वाणिज्य और कृषि प्रदान की है ॥30॥
Hey Narnath! Lokpitamah Brahmaji has given animal husbandry, commerce and agriculture as livelihood to the Vaishyas. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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