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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 28
श्लोक
3.8.28
धरित्रीपालनेनैव कृतकृत्या नराधिपा:।
भवन्ति नृपतेरंशा यतो यज्ञादिकर्मणाम्॥ २८॥
अनुवाद
पृथ्वीका पालन करनेसे ही राजा कृतज्ञ होते हैं, क्योंकि पृथ्वीपर होनेवाले यज्ञानुष्ठानमें राजाको भाग मिलता है ॥28॥
It is only by taking care of the earth that the kings become grateful, because the king gets a share in the yagya rituals performed on the earth. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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