श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.8.26 
दानानि दद्यादिच्छातो द्विजेभ्य: क्षत्रियोऽपि वा।
यजेच्च विविधैर्यज्ञैरधीयीत च पार्थिव:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय के लिए उचित है कि वह ब्राह्मणों को इच्छानुसार दान दे, विविध यज्ञ करे और विद्याध्ययन करे॥26॥
 
It is appropriate for a Kshatriya to give as much charity as he pleases to brahmins, perform various yagyas and study.॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)