श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.8.20 
सगर उवाच
तदहं श्रोतुमिच्छामि वर्णधर्मानशेषत:।
तथैवाश्रमधर्मांश्च द्विजवर्य ब्रवीहि तान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सगर बोले - हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अब मैं सम्पूर्ण वर्णाश्रम और आश्रमधर्म सुनना चाहता हूँ। कृपया उनका वर्णन करें।
 
Sagara said - O best of Brahmins! Now I want to listen to the complete Varnashrama and Ashrama Dharma. Kindly describe them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)