श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.8.2 
आराधिताच्च गोविन्द दाराधनपरैर्नरै:।
यत्प्राप्यते फलं श्रोतुं तच्चेच्छामि महामुने॥ २॥
 
 
अनुवाद
और हे महामुनि! मैं यह भी सुनना चाहता हूँ कि गोविन्द की पूजा करने वालों को उनकी पूजा करने से क्या फल मिलता है॥2॥
 
And O great sage! I also wish to hear about the rewards that those who worship Govinda receive after worshipping him. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)