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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 18
श्लोक
3.8.18
यस्य रागादिदोषेण न दुष्टं नृप मानसम्।
विशुद्धचेतसा विष्णुस्तोष्यते तेन सर्वदा॥ १८॥
अनुवाद
हे राजन! भगवान विष्णु उस शुद्ध मन वाले पुरुष पर सदैव प्रसन्न रहते हैं, जिसका मन आसक्ति आदि दोषों से दूषित नहीं होता॥18॥
O King! Lord Vishnu is always pleased with a person of pure mind whose mind is not tainted by the defects of attachment etc.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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