श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.8.13 
परापवादं पैशुन्यमनृतं च न भाषते।
अन्योद्वेगकरं वापि तोष्यते तेन केशव:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो दूसरों की निन्दा, चुगली या झूठ नहीं बोलता तथा दूसरों को दुःख पहुँचाने वाले वचन नहीं बोलता, वह भगवान केशव को अवश्य प्रसन्न करता है ॥13॥
 
He who does not criticise, gossip or tell lies about others and does not utter words that may cause pain to others, certainly pleases Lord Keshav. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)