vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
»
श्लोक 11
श्लोक
3.8.11
तस्मात्सदाचारवता पुरुषेण जनार्दन:।
आराध्यते स्ववर्णोक्तधर्मानुष्ठानकारिणा॥ ११॥
अनुवाद
अतः सदाचारी मनुष्य अपने वर्ण के लिए निर्धारित कर्तव्यों का पालन करते हुए श्री जनार्दन की पूजा करता है ॥11॥
Therefore a man of virtuous conduct worships Shri Janardana while performing the duties prescribed for his caste. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×