श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 8: विष्णु भगवान‍्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.8.11 
तस्मात्सदाचारवता पुरुषेण जनार्दन:।
आराध्यते स्ववर्णोक्तधर्मानुष्ठानकारिणा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अतः सदाचारी मनुष्य अपने वर्ण के लिए निर्धारित कर्तव्यों का पालन करते हुए श्री जनार्दन की पूजा करता है ॥11॥
 
Therefore a man of virtuous conduct worships Shri Janardana while performing the duties prescribed for his caste. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)