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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 8: विष्णु भगवान्की आराधना और चातुर्वर्ण्य-धर्मका वर्णन
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श्लोक 1
श्लोक
3.8.1
श्रीमैत्रेय उवाच
भगवन्भगवान्देव: संसारविजिगीषुभि:।
समाख्याहि जगन्नाथो विष्णुराराध्यते यथा॥ १॥
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे भगवन्! संसार को जीतने की इच्छा रखने वाले लोग जगत के स्वामी भगवान विष्णु का किस प्रकार पूजन करते हैं, इसका वर्णन कीजिए। 1॥
Shri Maitreyaji said – Oh God! Describe the way those who want to conquer the world worship Lord Vishnu, the Lord of the Universe. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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