श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.7.6 
यातनाभ्य: परिभ्रष्टा देवाद्यास्वथ योनिषु।
जन्तव: परिवर्तन्ते शास्त्राणामेष निर्णय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पापरूपी भोगों का अन्त हो जाने पर वे देवता आदि प्राणियों की योनियों में विचरण करते रहते हैं - ऐसा समस्त शास्त्रों का मत है ॥6॥
 
Thereafter, after the end of the pleasures of sins, they keep roaming in the forms of gods and other creatures - this is the opinion of all the scriptures. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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