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श्लोक 3.7.39  |
श्रीपराशर उवाच
एतन्मुने समाख्यातं गीतं वैवस्वतेन यत्।
त्वत्प्रश्नानुगतं सम्यक्किमन्यच्छ्रोतुमिच्छसि॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| श्री पराशर जी बोले - हे ऋषिवर! आपके प्रश्न के उत्तर में यमराज ने जो कुछ कहा था, वह मैंने आपको विस्तारपूर्वक बता दिया है। अब आप और क्या सुनना चाहते हैं?॥ 39॥ |
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| Shri Parashar Ji said - O sage! I have told you in detail whatever Yama had said in response to your question. What else do you want to hear?॥ 39॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे तृतीयेंऽशे सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥ |
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