श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.7.38 
किंकरा: पाशदण्डाश्च न यमो न च यातना:।
समर्थास्तस्य यस्यात्मा केशवालम्बनस्सदा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यम, यम के दूत, यम का पाश, यम का दण्ड या यम की यातनाएँ उस व्यक्ति को हानि नहीं पहुँचा सकतीं जिसका हृदय निरंतर भगवान् में समर्पित रहता है ॥38॥
 
Yama, Yama's messengers, Yama's noose, Yama's punishment or Yama's tortures cannot harm a person whose heart is constantly devoted to the Lord. ॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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