श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.7.28 
हरति परधनं निहन्ति जन्तून्
वदति तथाऽनृतनिष्ठुराणियश्च।
अशुभजनितदुर्मदस्य पुंस:
कलुषमतेर्हृदि तस्य नास्त्यनन्त:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो दूसरों का धन चुराता है, प्राणियों पर हिंसा करता है, झूठ और कटु वचन बोलता है और बुरे कर्मों में मग्न रहता है, उसके हृदय में भगवान् सदा निवास नहीं कर सकते ॥28॥
 
The Lord cannot eternally reside in the heart of a person who steals the wealth of others, commits violence against living beings, and speaks lies and harsh words and is intoxicated by evil deeds. ॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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