श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.7.26 
यमनियमविधूतकल्मषाणा-
मनुदिनमच्युतसक्तमानसानाम्।
अपगतमदमानमत्सराणां
त्यज भट दूरतरेण मानवानाम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे दूत! जिनके पाप यम और नियम के द्वारा दूर हो गए हैं, जिनका हृदय सदैव श्री अच्युत में समर्पित है, तथा जिनमें अभिमान, अहंकार या ईर्ष्या का लेश मात्र भी नहीं बचा है, उन्हें आप दूर छोड़ दीजिए॥ 26॥
 
O messenger! Those whose sins have been removed by the rules of Yama and Niyama, whose hearts are always devoted to Shri Achyuta, and who have no trace of pride, arrogance or envy left in them; you should leave them far away.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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