| श्री विष्णु पुराण » अंश 3: तृतीय अंश » अध्याय 7: यमगीता » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 3.7.24  | विमलमतिरमत्सर: प्रशान्त-
श्शुचिचरितोऽखिलसत्त्वमित्रभूत:।
प्रियहितवचनोऽस्तमानमायो
वसति सदा हृदि तस्य वासुदेव:॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | जो शुद्धचित्त, आसक्ति से रहित, शान्त, शुद्धचरित्र, मित्रवत, प्रेममय, समस्त प्राणियों का हितैषी तथा अभिमान और मोह से रहित है, उसके हृदय में भगवान वासुदेव सदैव निवास करते हैं॥24॥ | | | | Lord Vasudev always resides in the heart of a person who is pure-minded, free from attachment, peaceful, pure-character, friendly, loving and well-wisher of all living beings and free from pride and illusion. 24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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