स्फटिकगिरिशिलामल: क्व विष्णु-
र्मनसि नृणां क्व च मत्सरादिदोष:।
न हि तुहिनमयूखरश्मिपुञ्जे
भवति हुताशनदीप्तिज: प्रताप:॥ २३॥
अनुवाद
कहाँ स्फटिक के समान पवित्र भगवान विष्णु और कहाँ मनुष्यों के मन में रहने वाला राग-द्वेष रूपी दुर्गुण? [इन दोनों का मेल नहीं हो सकता] हिमकर (चन्द्रमा) के किरणजाल में अग्नि की गर्मी कभी नहीं रह सकती।॥23॥
Where is Lord Vishnu, who is as pure as a crystal stone, and where is the evil of attachment and hatred that resides in the minds of humans? [There can be no combination of these two] The heat of fire can never remain in the ray net of Himkar (Moon). 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥