श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  3.7.2-3 
सप्त द्वीपानि पातालविधयश्च महामुने।
सप्तलोकाश्च येऽन्त:स्था ब्रह्माण्डस्यास्य सर्वत:॥ २॥
स्थूलै: सूक्ष्मैस्तथा सूक्ष्मसूक्ष्मात्सूक्ष्मतरैस्तथा।
स्थूलात्स्थूलतरैश्चैव सर्वं प्राणिभिरावृतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे महर्षि! इस ब्रह्माण्ड के भीतर जो सात द्वीप, सात पाताल और सात लोक हैं, वे सब स्थूल, सूक्ष्म, सूक्ष्मतर, सूक्ष्मतर और स्थूलतर जीवों से भरे हुए हैं॥2-3॥
 
O great sage! The seven islands, the seven netherworlds and the seven worlds - all these places which are within this universe, are filled with gross, subtle, subtler, microscopic and grosser and grosser living beings.॥2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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