श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.7.14 
कालिङ्ग उवाच
स्वपुरुषमभिवीक्ष्य पाशहस्तं
वदति यम: किल तस्य कर्णमूले।
परिहर मधुसूदनप्रपन्नान्-
प्रभुरहमन्यनृणामवैष्णवानाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
कलिंग बोला - अपने सेवक को हाथ में पाश लिए हुए देखकर यमराज ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा - 'जो भगवान मधुसूदन की शरण में आए हैं, उन्हें छोड़ दो, क्योंकि मैं वैष्णवों को छोड़कर शेष सभी मनुष्यों का स्वामी हूँ।॥ 14॥
 
Kalinga said: Seeing his attendant holding the noose in his hands, Yamaraja whispered in his ears, 'Release those who have surrendered to Lord Madhusudana, because I am the master of all human beings except Vaishnavas.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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