श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 7: यमगीता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.7.1 
श्रीमैत्रेय उवाच
यथावत्कथितं सर्वं यत्पृष्टोऽसि मया गुरो।
श्रोतुमिच्छाम्यहं त्वेकं तद्भवान‍्प्रब्रवीतु मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेय बोले, "हे गुरुवर! मैंने आपसे जो कुछ पूछा था, आपने उसे यथावत् बताया है। अब मैं एक बात और सुनना चाहता हूँ, कृपया वह मुझे बताइए।"
 
Sri Maitreya said, "O Guru! Whatever I asked you, you have described it exactly as it is. Now I want to hear one more thing, please tell me that."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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