श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 6: सामवेदकी शाखा, अठारह पुराण और चौदह विद्याओंके विभागका वर्णन  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.6.18-19 
काश्यप: संहिताकर्ता सावर्णिश्शांसपायन:।
रोमहर्षणिका चान्या तिसॄणां मूलसंहिता॥ १८॥
चतुष्टयेन भेदेन संहितानामिदं मुने॥ १९॥
 
 
अनुवाद
काश्यपगोत्रिय अकृतव्रण, सावर्णि और शांस्पायन - ये तीन संहिताकार हैं। उन तीन संहिताओं का आधार रोमन हर्षणजी की संहिता है। हे मुने! मैंने इन चारों संहिताओं का सार इस विष्णुपुराण संहिता को बनाया है। 18-19॥
 
Kashyapagotriya Akritavran, Savarni and Shanspayan – these three are codifiers. The basis of those three codes is the code of Roman Harshanji. Hey Mune! I have made this Vishnupuran Samhita the essence of these four codes. 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)