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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 6: सामवेदकी शाखा, अठारह पुराण और चौदह विद्याओंके विभागका वर्णन
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श्लोक 17
श्लोक
3.6.17
सुमतिश्चाग्निवर्चाश्च मित्रायुश्शांसपायन:।
अकृतव्रणसावर्णी षट् शिष्यास्तस्य चाभवन्॥ १७॥
अनुवाद
सुमति, अग्निवर्चा, मित्रयु, शन्स्पायन, अकृतव्रण और सावर्णि उन सूतजी के छह शिष्य थे। 17॥
Sumati, Agnivarcha, Mitrayu, Shanspayan, Akritavran and Savarni were the six disciples of that Sutji. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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