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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 6: सामवेदकी शाखा, अठारह पुराण और चौदह विद्याओंके विभागका वर्णन
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श्लोक 1
श्लोक
3.6.1
श्रीपराशर उवाच
सामवेदतरोश्शाखा व्यासशिष्यस्स जैमिनि:।
क्रमेण येन मैत्रेय बिभेद शृणु तन्मम॥ १॥
अनुवाद
श्री पराशर बोले, 'हे मैत्रेय! व्यासजी के शिष्य जैमिनी ने सामवेद की शाखाओं को किस क्रम में विभाजित किया, इसके विषय में मुझसे सुनिए।
Sri Parashara said, 'O Maitreya! Listen to me about the order in which Jaimini, the disciple of Vyasa, divided the branches of the Samaveda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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