श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.5.6-7 
स्वस्रीयं बालकं सोऽथ पदा स्पृष्टमघातयत्॥ ६॥
शिष्यानाह स भो शिष्या ब्रह्महत्यापहं व्रतम्।
चरध्वं मत्कृते सर्वे न विचार्यमिदं तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने अपने भतीजे को पैरों से स्पर्श करके मार डाला। फिर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा - 'हे शिष्यों! तुम सब लोग बिना कुछ सोचे-समझे मेरे लिए ऐसा व्रत करो जिससे ब्रह्महत्या का पाप दूर हो जाए।' ॥6-7॥
 
After this, he killed his nephew by touching him with his feet [due to negligence]. Then he said to his disciples - 'O disciples! All of you without thinking about anything should perform a fast for me which removes the sin of killing a brahmin.' ॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)