vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन
»
श्लोक 26
श्लोक
3.5.26
श्रीपराशर उवाच
इत्येवमादिभिस्तेन स्तूयमानस्स वै रवि:।
वाजिरूपधर: प्राह व्रियतामिति वाञ्छितम्॥ २६॥
अनुवाद
श्री पराशर बोले - जब उन्होंने इस प्रकार स्तुति की, तब भगवान सूर्य घोड़े के रूप में प्रकट हुए और बोले - 'अपना इच्छित वर मांगो।'
Sri Parashara said - When he praised Him in this manner, Lord Surya appeared in the form of a horse and said - 'Ask for your desired boon.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×