श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.5.26 
श्रीपराशर उवाच
इत्येवमादिभिस्तेन स्तूयमानस्स वै रवि:।
वाजिरूपधर: प्राह व्रियतामिति वाञ्छितम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - जब उन्होंने इस प्रकार स्तुति की, तब भगवान सूर्य घोड़े के रूप में प्रकट हुए और बोले - 'अपना इच्छित वर मांगो।'
 
Sri Parashara said - When he praised Him in this manner, Lord Surya appeared in the form of a horse and said - 'Ask for your desired boon.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)