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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन
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श्लोक 23
श्लोक
3.5.23
स्पृष्टो यदंशुभिर्लोक: क्रियायोग्यो हि जायते।
पवित्रताकारणाय तस्मै शुद्धात्मने नम:॥ २३॥
अनुवाद
जिनकी किरणों की पवित्रता के कारण मनुष्य अनुष्ठान करने में समर्थ होते हैं, उन शुद्धस्वरूप सूर्यदेव को नमस्कार है॥23॥
Salutations to the Sun God in its pure form due to the purity of whose rays, when touched, the people are capable of performing rituals. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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