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श्री विष्णु पुराण
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अंश 3: तृतीय अंश
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अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन
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श्लोक 22
श्लोक
3.5.22
सत्कर्मयोग्यो न जनो नैवाप: शुद्धिकारणम्।
यस्मिन्ननुदिते तस्मै नमो देवाय भास्वते॥ २२ ॥
अनुवाद
उन भस्वन देव को नमस्कार है, जिनके उदय के बिना मनुष्य पुण्य कर्म नहीं कर सकते और जल भी शुद्धि का कारण नहीं बन सकता। ॥22॥
Salutations to that Bhasvan Deva, without whose rising men cannot indulge in good deeds and water cannot become the cause of purification. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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