vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 3: तृतीय अंश
»
अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन
»
श्लोक 21
श्लोक
3.5.21
अपहन्ति तमो यश्च जगतोऽस्य जगत्पति:।
सत्त्वधामधरो देवो नमस्तस्मै विवस्वते॥ २१॥
अनुवाद
जो इस सम्पूर्ण जगत् के अंधकार को दूर करते हैं, जो सत्त्वस्वरूप हैं, उन जगतपिता को नमस्कार है॥21॥
Salutations to the Father of the Universe who removes the darkness of this entire world, the embodiment of Sattva, Vivaswan. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×