श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.5.21 
अपहन्ति तमो यश्च जगतोऽस्य जगत्पति:।
सत्त्वधामधरो देवो नमस्तस्मै विवस्वते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो इस सम्पूर्ण जगत् के अंधकार को दूर करते हैं, जो सत्त्वस्वरूप हैं, उन जगतपिता को नमस्कार है॥21॥
 
Salutations to the Father of the Universe who removes the darkness of this entire world, the embodiment of Sattva, Vivaswan. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)