श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.5.20 
हिमाम्बुघर्मवृष्टीनां कर्ता भर्ता च य: प्रभु:।
तस्मै त्रिकालरूपाय नमस्सूर्याय वेधसे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो हिम, जल और ताप के रचयिता हैं [अर्थात् सर्दी, वर्षा, ग्रीष्म आदि ऋतुओं के कारण हैं] और जो [संसार का] पालन करते हैं, जो तीनों कालों के रचयिता हैं, उन सूर्यदेव को नमस्कार है॥20॥
 
Salutations to the Sun God, who is the creator of snow, water and heat [i.e., the cause of the seasons like winter, rain, summer etc.] and who nourishes [the world], who is the creator of all the three times. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)