श्री विष्णु पुराण  »  अंश 3: तृतीय अंश  »  अध्याय 5: शुक्लयजुर्वेद तथा तैत्तिरीय यजु:शाखाओंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.5.17 
नमोऽग्नीषोमभूताय जगत: कारणात्मने।
भास्कराय परं तेजस्सौषुम्नरुचिबिभ्रते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो अग्नि और चन्द्रमा के रूप हैं, जो जगत के कारण हैं और जो सुषुम्ना नामक परम शक्ति से युक्त हैं, उन भगवान भास्कर को नमस्कार है। ॥17॥
 
Salutations to Lord Bhaskar who is in the form of fire and moon, the cause of the universe and who possesses the supreme power called Sushumna. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)